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बिहार राज्य में अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण की परम्परा :

अतीत और वर्तमान

भारत का संविधान अनुसूचित जातियोँ  और अनुसूचित जनजातियोँ के संरक्षण की एक सुचिंतित प्रणाली प्रस्तुत करता है किन्तु व्यावहारिक स्तर पर इन वर्गों के साथ सामाजिक-अन्याय के निवारण और निरोध में कठिनाई अनुभव की जा रही थी.

      जब वर्ष 1968 में तमिलनाडु के किलावेनमनी में 42 दलितों की ह्त्या हुई और सारे देश में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के निवारणार्थ पुलिस की पृथक प्रणाली विक्सित करने का निर्णय लिया गया.

      वर्ष 1974 में बिहार में शिकायत निराकरण कोषांग नाम से पुलिस की एक स्वतंत्र-शाखा सृजित की गयी जिसे इन जातियों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के अन्वेषण, जाँच, निवारण और निरोध का दायित्व सौंपा गया.

      वर्ष 1975 में इस कोषांग के प्रभारी के रूप में एक उप महानिरीक्षक के पद का सृजन किया गया जिसे इस कोषांग का स्वतंत्र प्रभार दिया गया.

 

वर्ष 1975 में शिकायत निराकरण कोषांग के प्रभारी पुलिस उप-महानिरीक्षक के पद का सृजन

बिहार में अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के सम्विधान-प्रदत्त अधिकारों के संरक्षण की एक समृद्ध और सुदृढ़ प्रशासनिक परम्परा रही है . वर्ष 1975 के पूर्व से ही ‘’ शिकायत निराकरण कोषांग ‘’ संस्थापित और कार्यरत था जो अनुसूचित जातियोँ, अनुसूचित जनजातियोँ और अल्पसंख्यकों के विरुद्ध किए गए अपराधों के निवारण , निरोध और अन्वेषण का कर्तव्य निर्वहन करता था.
वर्ष 1975 में शिकायत निराकरण कोषांग के प्रभारी पुलिस उप-महानिरीक्षक के पद का सृजन किया गया. आज वह पुलिस महानिरीक्षक कोटि के पदाधिकारी के अधीन कार्यरत है जिनका पद-नाम पुलिस महानिरीक्षक, कमजोर वर्ग है..

वर्ष 1976 में शिकायत निराकरण कोषांग पटना में एक अनुसूचित-जाति अनुसूचित-जनजाति अल्पसंख्यक थाना का सृजन


1976 में सरकार ने शिकायत निराकरण कोषांग के पटना स्थित मुख्यालय में एक पुलिस थाना के सृजन की अधिसूचना निर्गत की जिसका अधिक्षेत्र सम्पूर्ण बिहार था तथा जो अनुसूचित जातियोँ, अनुसूचित जनजातियोँ एवं अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हुए अत्याचारों के सफल अन्वेषण हेतु निर्दिष्ट किया गया था ..

वर्ष 1981 में शिकायत निराकरण कोषांग पटना में दस अनुसूचित-जाति अनुसूचित-जनजाति थानो का सृजन
 
वर्ष 1981 में सरकार ने पटना के अतिरिक्त पुनः
1. नालंदा
2. रोहतास
3. भोजपुर
4. गया
5. वैशाली
6. समस्तीपुर
7. बेगूसराय
8. भागलपुर
9. मुंगेर
10.रांची

जिलों में इन विशेष थानों को अधिसूचित किया और इस प्रकार बिहार राज्य में पटना सहित कुल 11 विशेष थाने संस्थापित और कार्यशील हुए. इन थानों के कर्त्तव्य निर्वहन के लिए सरकार ने एक लिखित मार्गदर्शी सिद्धांत पत्र निर्गत किया जो निम्नवत उदृत किया जाता है-

अनुदेश 1

शिकायत निराकरण कोषांग के लिए एक हरिजन पुलिस थाना गृह (आरक्षी) विभाग के अधिसूचना संख्या 74/पी-4-1025/76 गृ0आ0 10730 दिनांक 25 अगस्त 1976 द्ववारा पटना मुख्यालय में सृजित किया गया जिसका अधिकार क्षेत्र् पूरे बिहार राज्य रखा गया था ।
शिकायत निराकरण कोषांग के लिए 10 अतिरिक्त पुलिस थाने का सृजन किया गया है जिनका मुख्यालय तथा अधिकार क्षेत्र् उपर दिये गये हैं । ये थाने हरिजन/आदिवासी/अल्पसंख्यकों पर किये गये अत्याचार संबंधित मामलों में अंकित करेंगे तथा उनका अनुसंधान करेंगे । वे थाने उपर्युक्त व्यक्तियों पर किये गये अत्याचार संबंधी सरकारी या गैर सरकारी श्रोतों में प्रकट या गुप्त सूचना एकत्र करेंगे एवं इनके द्ववारा समर्पित आवेदन पत्रें की जाँच करेंगे ।

2- इन थानों के कार्य आसानी तथा प्रभावकारी रूप से प्रमाणित हों सुनिश्चित करने के लिए एक थाना प्रभारी अथवा इस काम के लिए आरक्षी उप महानिरीक्षक द्ववारा नियुक्त कोई पदाधिकारी थाना में दर्ज किये गये सभी प्राथमिकी अंकित करेंगे तथा कार्रवाई प्रारंभ करेंगे । प्राथमिकी की प्रतियां संबंधित न्यायालय तथा आरक्षी उप महानिरीक्षक हरिजन कोषांग तथा जिस जिले के केस है उस जिले के आरक्षी अधीक्षक को भेज दिया जायेगा ।

3- प्राथमिकी पुलिस हस्तक में निर्धारित अपराधा सूची के साथ एक दिन के अन्दर आरक्षी उपाधीक्षक के समक्ष उपस्थापित किया जायेगा । आरक्षी उपाधीक्षक प्राथमिकी एवं सूची में लिखे गये प्रविष्टिया पढ़ते समय दोनों में उचित स्थान पर हस्ताक्षर करेंगे । अपराधा सूची उप आरक्षी अधीक्षक के समक्ष पुनः उपस्थापित जायेगा ताकि उसमें अनुसंधान को अभिलेख जो हर माने में सम्पूर्ण रहेगा एवं जिसके साथ अन्तिम ज्ञाप संलग्न रहेगा । उसके साथ पुनः हस्ताक्षर करेंगे ।

4- स्टेशन डायरी पुलिस थाना में रखा जायेगा जिसमें प्रत्येक दो घंटे पर प्रविष्टिया की जायेगी । अपराधा सूची तथा स्टेशन डायरी रख रखाव (Maintenance) के लिए थाना प्रभारी आरक्षी निरीक्षक के एक सहायक आरक्षी अवर निरीक्षक सिपाही सहायता करेंगे ।

5- अनुसंधान पदाधिकारी केस डायरी दो प्रतियों में रखेंगे एवं एक कार्बन प्रति आरक्षी उपाधीक्षक को भेज देंगे । केस का अनुसंधान आरक्षी उप महानिरीक्षक शिकायत द्वारा कोषांग के पदाधिकारियों को पृष्ठांकित किया जायेगा ।

6- यदि अनुसंधान में कोई गंभीर त्रुटियां पाई गई तो संबंधित आरक्षी उपाधीक्षक द्वारा शीघ्रताशीघ्र आरक्षी अधीक्षक आरक्षी उप महानिरीक्षक (शिकायत निराकरण कोषांग) के नोटिस में लाया जायेगा ।

7- केस दर्ज होने के साथ साथ आरक्षी उपाधीक्षक अनुसंधान के प्रगति पर कड़ी निगरानी रखेंगे । केस का पर्यवेक्षण शिकायत प्रकोष्ठ का एक राजपत्र्ति पदाधिकारी अथवा संबंधित जिले के आरक्षी उपाधीक्षक अथवा आरक्षी अधीक्षक जैसे आरक्षी उप महानिरीक्षक आदेश देंगे द्वारा किया जायेगा । वे अपना पर्यवेक्षण टिप्पणी आरक्षी उप महानिरीक्षक (शिकायत निराकरण कोषांग) को समर्पित करेंगे एवं यदि जिले के पदाधिकारी द्वारा पर्यवेक्षण किये गये हैं तो क्षेत्रीय उप महानिरीक्षक को भी एक प्रति समर्पित करेंगे ।

8- अनुसंधान पदाधिकारियों द्वारा एकत्र किया गया निदेश (Exhibit) को रखने के लिए एक मालखाना होगा ये लोहे के आलमीरा में उचित लेबल साट कर रखा जायेगा । पुलिस हस्तक में निर्धारित प्रपत्र में एक मालखाना वही थाना में रखा जायेगा।

9- अन्य थानों का निराकरण साल में एक बार आरक्षी उपाधीक्षक शिकायत निराकरण कोषांग द्वारा साल में एक बार आरक्षी अधीक्षक या आरक्षी उप महानिरीक्षक शिकायत निराकरण कोषांग द्वारा किया जायेगा ।

 

      बिहार में 1979 में बेलछी और 1980 में पिपरा में दलितों का नर-संहार हुआ तब सम्पूर्ण देश में इस विषय पर गंभीर चिंता व्यक्त की गयी . इसी तरह देश के अन्य भागों में भी दलितों के विरुद्ध हो रहे अपराधों से उत्पन्न चिंता के परिणाम-स्वरुप 15 अगस्त 1987 को तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री राजीव गांधी ने लाल किले से देश को संबोधित करते हुए इस प्रकार के अत्याचार के निवारण और निरोध हेतु क़ानून बनाए जाने की घोषणा की.

      इस प्रकार वर्ष 1989 में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ( अत्याचार निवारण ) अधिनियम पारित और प्रवर्तित किया गया तथा वर्ष 1995 में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ( अत्याचार निवारण ) नियमावली पारित की गयी.

 

 

वर्ष 2008 : स.अ.नि. कोटि तक के पुलिस अधिकारी भी अन्वेषण अधिकारी के रूप में अधिसूचित

अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) नियमावली 1995 के नियम 7 द्वारा यह प्रावधान किया गया था कि अत्याचार-कांडों का अन्वेषण , पुलिस उपाधीक्षक कोटि से अन्यून पंक्ति के पुलिस अधिकारी द्वारा ही किया जाएगा ...
कांडों की अधिकता और अन्वेषण की सुकरता और त्वरण की दृष्टि से राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2008 में बिहार राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित करते हुए सहायक अवर निरीक्षक कोटि तक के पुलिस अधिकारी को भी अन्वेषण अधिकारी के रूप में अधिसूचित किया गया..

परिणामतः कांडों के निष्पादन में तीव्रता की संभावना बनी और सम्प्रति कांडों का त्वरित-अन्वेषण संभव हो पा रहा है...
ज्ञातव्य है कि महत्वपूर्ण प्रकार के अत्याचार अपराधों का अन्वेषण पुलिस निरीक्षक या पुलिस उपाधीक्षक कोटि के पदाधिकारी द्वारा ही किया जाता है...

वर्ष 2011 : राज्य के 40 सभी जिलों में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति विशेष थानों का सृजन

सितम्बर 2011 में बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के निर्देश पर, सरकार ने ऐतिहासिक पहल करते हुए, राज्य के सभी जिलों में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति विशेष थानों को अधिसूचित किया और आज ये विशेष थाने कार्यशील और प्रभावी हो चुके हैं...और इस प्रकार बिहार देश का प्रथम राज्य बन चुका है जहां
इन चालीस थानों के सुदृढीकरण हेतु विस्तृत और व्यापक कार्य-योजना निर्मित हो चुकी है और अब क्रियान्वयन के स्तर पर है..इन सभी थानों के लिए आदर्श थाना के लिए विनिर्धारित मानक भवन निर्मित किए जाने की प्रक्रिया, पुलिस मुख्यालय द्वारा प्रारम्भ की जा चुकी है...

राज्य अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संरक्षण कक्ष की उपलब्धियां

क्षतिपूर्ति की मानक राशि में वृद्धि के लिए कार्रवाई

राज्य अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार नियंत्रण ) नियमावली 1995 के नियम 12(4) के उपबंध 1 की अनुसूची द्वारा विहित
क्षतिपूर्ति की राशि में वृद्धि का प्रस्ताव दिनांक 17 सितम्बर 2011 को
माननीय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित
‘’ राज्य स्तरीय सतर्कता और अनुश्रवण समिति’’
की बैठक में पुलिस महानिरीक्षक (कमजोर वर्ग) द्वारा दिया गया जिसे माननीय मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत करने की कृपा की गयी और राज्य सरकार द्वारा भारत सरकार को एतत्संबंधी प्रस्ताव भेजा गया और दिसंबर 2011 से ही भारत सरकार द्वारा अत्याचार पीडितो को देय क्षतिपूर्ति की राशि में 150 % की वृद्धि की जा चुकी है.


अत्याचार-पीड़ितों के परिजन और साक्षियों को देय भत्तो के भुगतान की प्रक्रिया का आरम्भ

नियमावली 1995 के नियम 11 के प्रावाधानान्तर्गत अत्याचार-पीड़ितों के परिजन और साक्षियों को पुलिस और न्यायालय में साक्ष्य देने की तिथि के लिए दैनिक भत्ता, यात्रा भत्ता , परिवहन भत्ता आदि के भुगतान की कार्रवाई संरक्षण-कक्ष द्वारा शुरू करायी गयी और अब सभी जिलों में पुलिस द्वारा विहित रीति से ऐसे प्रस्ताव, सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों को दिए जा रहे हैं.

पुलिस एवं अन्य सरकारी सेवकों में अधिनियम और नियमावली के प्रावधानों में दक्षता हेतु निरंतर ज्ञान-सत्रों का आयोजन

संरक्षण-कक्ष द्वारा वर्ष 2011 से ही पुलिस एवं अन्य सरकारी सेवकों में अधिनियम और नियमावली के प्रावधानों में दक्षता हेतु निरंतर ज्ञान-सत्रों का आयोजन किया जा रहा है ..
प्रथम ज्ञान-सत्र का आयोजन पुलिस महानिरीक्षक (कमजोर वर्ग) द्वारा पटना के तारामंडल सभागार में मई 2011 में आयोजित किया गया जिसका उदघाटन राज्य अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के माननीय मंत्री श्री जीतन राम मांझी द्वारा किया गया और इस ज्ञान-सत्र को
श्री अमरीक सिंह निम्बरान, भा.पु.से.
श्री राजेश चन्द्र , भा.पु.से.
श्री अरविंद पाण्डेय, , भा.पु.से.
श्री सी के अनिल , भा.प्र.से.
श्री पारस नाथ . भा.पु.से.

आदि विद्वान् वक्ताओं द्वारा अधिनियम और नियमावली के विभिन्न उपयोगी प्रावधानों से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया. इस ज्ञान सत्र के बाद, निरंतर ज्ञान-सत्रों का आयोजन, आवधिक रूप से किया जा रहा है जिसमे राज्य के सभी विशेष न्यायालयों से सम्बद्ध विशेष लोक अभियोजको, सभी विशेष थानों के थानाध्यक्षों तथा प्रत्येक जिले के लिए नाम-निर्दिष्ट नोडल पुलिस अधिकारियों (जिले के पुलिस उपाधीक्षक, मुख्यालय ) को त्वरित-अन्वेषण, त्वरित-विचारण एवं सिद्धदोषों की संख्या में वृद्धि के लक्ष्य से प्रशिक्षित किया गया है एवं यह प्रशिक्षण निरंतर जारी है.


चित्रों में ज्ञान-सत्र

मई 2011 में तारा मंडल सभागार, पटना में आयोजित ज्ञान-सत्र के प्रतिभागी पुलिस अधिकारी , विशेष लोक अभियोजक एवं जिला कल्याण अधिकारी गण


मई 2011 में तारा मंडल सभागार पटना में आयोजित ज्ञान-सत्र के प्रतिभागी पुलिस अधिकारी , विशेष लोक अभियोजक एवं जिला कल्याण अधिकारी गण को संबोधित करते हुए एवं उनकी जिज्ञासाओं को शांत करते हुए पुलिस महानिरीक्षक अरविंद पाण्डेय


मई 2011 में तारा मंडल सभागार पटना में आयोजित ज्ञान-सत्र के प्रतिभागी पुलिस अधिकारी , विशेष लोक अभियोजक एवं जिला कल्याण अधिकारी गण को संबोधित करते हुए श्री अमरीक सिंह निम्बरान,तत्कालीन अपर पुलिस महानिदेशक,अपराध अन्वेषण विभाग.


मई 2011 में तारा मंडल सभागार पटना में आयोजित ज्ञान-सत्र के प्रतिभागी पुलिस अधिकारी , विशेष लोक अभियोजक एवं जिला कल्याण अधिकारी गण को अधिनियम एवं नियमावली के प्रावधानों पर अपना वक्तव्य देते हुए श्री अरविंद पाण्डेय, पुलिस महानिरीक्षक (कमजोर वर्ग)

दिनांक 6 अगस्त 2013 को बिहार के सभी जिलो में अत्याचार काण्डो के अनुश्रवण के लिये नाम-निर्दिष्ट नोडल पुलिस अधिकारियो के लिए ज्ञान-सत्र का आयोजन संरक्षण कक्ष द्वारा किया गया. जिसमे पुलिस महानिरीक्षक अरविंद पाण्डेय ने अधिकारियों को पावर-प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से अधिनियम एवं नियमावली के प्रावधानो का प्रशिक्षण दिया ऐसे ज्ञान सत्रों को समाचार पत्रों द्वारा अतिशय प्रमुखता के साथ समाचार के रूप में प्रकाशित किया जाता है-

दिनांक 7 अगस्त 2013 को राष्ट्रीय सहारा में प्रकाशित समाचार..

थाना-सृजन एवं अन्य अधिसूचनाओं की सत्य-प्रतिलिपियों की प्रस्तुति  

 

बिहार सरकार
गृह (आरक्षी) विभाग ।
अधिसूचना


पटना-15, दिनांक 25 अगस्त 1976
संख्या 74/पी-4-1025/76 गृ0आ0 10730/दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (अधिनियम संख्या-2 1974) की धारा-2(एस) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार के राज्यपाल घोषित करते हैं कि आरक्षी उप महानिरीक्षक (शिकायत निराकरण कोषांग) के पटना स्थित मुख्यालय में एक पुलिस थाना स्थापित किया जाता है जिसका अधिकार क्षेत्र् हरिजनोंए आदिवासियों तथा अल्पसंख्यकों पर किये गये अत्याचार से संबंधित मामलों के लिए पूरे बिहार में विस्तृत रहेगा ।

मामले जो इस पुलिस थाना में दर्ज होंगे उन्हें आरक्षी उप महानिरीक्षक (शिकायत निराकरण कोषांग) के नियंत्र्ण में शिकायत सेल के पदाधिकारियों द्वारा संलग्न अनुदेशों के अनुसार अनुसंधान किया जाएगा ।

बिहार के राज्यपाल के अनुदेश से
ह0-नरेन्द्र पाल सिंह
सरकार के अपर सचिव।

 

ज्ञाप संख्या 4/पी-4-1025/76 गृ0आ0 10730 पटना-15 दिनांक 25 अगस्त 1976
प्रतिलिपि- अधीक्षक राजकीय मुद्रणालय गुलजारबाग पटना को बिहार राजपत्र में प्रकाशनार्थ अग्रसारित ।


बिहार के राज्यपाल के अनुदेश से
ह0-नरेन्द्र पाल सिंह
सरकार के अपर सचिव।

 

ज्ञाप संख्या 4/पी-4-1025/76 गृ0आ0 10730 पटना-15 दिनांक 25 अगस्त 1976
प्रतिलिपि- आरक्षी महानिरीक्षक बिहार पटना/आरक्षी महानिरीक्षक(शिकायत कोषांग) बिहार पटना/सरकार के सभी विभाग/निर्वाचन विभाग/सभी जिलाधिकारी/सभी अनुमंडल पदाधिकारी/सभी आरक्षी अधीक्षक को सूचनार्थ अग्रसारित ।

 

बिहार के राज्यपाल के अनुदेश से
ह0-नरेन्द्र पाल सिंह
सरकार के अपर सचिव।
10 थानों के सृजन की अधिसूचना

बिहार सरकार
गृह (आरक्षी) विभाग ।
.........................
अधिसूचना
...........
पटना दिनांक 15 जुलाई 1981 दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (अधिनियम संख्या 21974) की धारा 2(एस) द्ववारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार के राज्यपाल घोषित करते हैं कि गृह (आरक्षी) की अधिसूचना 74/पी-4-102/78 गृ0 आ0 - 10730 दिनांक 25 अगस्त 1976 पटना स्थित मुख्यालय में सृजित एक पुलिस थाना के अतिरिक्त बिहार राज्य के निम्नांकित मुख्यालय में हरिजन पुलिस थाना स्थापित किये जाते हैं जिनका अधािकार ऐसी हरिजनों तथा अल्पसंख्यकों पर किये गये अत्याचार के संबंधित मामलों के लिए उनके दिये गये क्षेत्र् में विस्तृत रहेगा ।

ऐसे मामलों जो इन पुलिस थानों में दर्ज होंगे उन्हें आरक्षी उप-महानिरीक्षक (निराकरण कोषांग) के नियंत्र्ण में संलग्न अनुदेशों के अनुसार अनुसंधान किया जायेगा ।

जिला मुख्यालय अधिकार क्षेत्र
नालंदा बिहारशरी पुरा नालंदा जिला ।
रोहतास सासाराम पुरा रोहतास जिला
भोजपुर आरा पुरा भोजपुर जिला ।
गया गया गया नवादा औरंगाबाद ।
वैशाली हाजीपुर वैशाली मुजफ्फरपुर सीतामढ़ी सारण
सिवान गोपालगंज पश्चिम चम्पारण बेतिया एवं पूर्वी चंपारण मोतिहारी ।
समस्तीपुर समस्तीपुर समस्तीपुर दरभंगा तथा मधुबनी ।
बेगूसराय बेगूसराय बेगूसराय खगडि़या कटिहार पूर्णियां मधोपुरा तथा सहरसा ।
भागलपुर भागलपुर भागलपुर दुमका एवं साहेबगंज ।
मुंगेर मुंगेर मुंगेर ।
रांची रांची रांची

गिरीडीह हजारीबाग बोकारो धानवाद जमशेदपुर सिंहभूम एवं पलामू । ज्ञाप संख्या 3/पी1-1035/81 गृ0आ0 7783/ पटना दिनांक 15 जुलाई 1981 प्रतिलिपि- अधीक्षक राजकीय मुद्रणालय गुलजारबाग पटना को बिहार राजपत्र में प्रकाशनार्थ अग्रसारित ।

बिहार के राज्यपाल के अनुदेश से
ह0-तारकेश्वर प्रसाद
सरकार के अवर सचिव।

ज्ञाप संख्या 3/पी1-1035/81 गृ0आ0 7783/ पटना दिनांक 15 जुलाई 1981 प्रतिलिपि-सरकार के सभी विभाग/आरक्षी महानिरीक्षक बिहार पटना/आरक्षी उप महानिरीक्षक (शिकायत कोषांग) बिहार पटना/सभी आरक्षी उप महानिरीक्षक/सभी जिलाधािकारी/सभी आरक्षी अधीक्षक/सभी अनुमंडल पदाधिकारी को सूचनार्थ ।

बिहार के राज्यपाल के अनुदेश से
ह0-तारकेश्वर प्रसाद
सरकार के अवर सचिव।

 

30 जिलों में अनुसूचित जाति/जनजाति विशेष थानों के सृजन का आदेश

बिहार सरकार
गृह विभाग
(आरक्षी)

सेवा में
महालेखाकार (ले0 एवं ह0)
बिहार पटना ।

द्वारा- वित्त विभाग बिहार पटना ।
पटना दिनांकः

 

विषयः- राज्य के 30 जिलों में अनुसूचित जाति/जनजाति थाना की स्थापना एवं उसके संचालन हेतु कुल 510 (पांच सौ दस) पदों के सृजन की स्वीकृति।

महाशय,


अनु0जाति और अनु0जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 एवं नियम-1995 के तहत अनु0जाति और अनु0जनजाति के सदस्यों को अत्याचार से राहत देने एवं प्रतिवेदित कांडों के त्वरित अनुसंधान हेतु राज्य के सभी जिलों में अनुसूचित जाति/जनजाति के लिये विशेष थाने खोले जाने की आवश्यकता है । इस क्रम में पूर्व से राज्य के 10 (दस) जिलों यथा पटना वैशाली समस्तीपुर बेगुसराय मुंगेर भागलपुर नालंदा गया रोहतास एवं भोजपुर में अनु0जाति/जनजाति थाना कार्यरत है ।
अतः इस विषय पर सम्यक विचारोपरांत राज्य के शेष 30 जिलों यथा सिवान/सारण/गोपालगंज/पूर्वी चंपारण (मोतिहारी)/पश्चिमी चंपारण (बेतिया)/बगहा/सीतामढ़ी/ शिवहर/मुजफरपुर/दरभंगा/मधुबनी/खगडि़या/सहरसा/पूर्णियाँ /कंटिहार/किशनगंज/अररिया/मधोपुरा/सुपौल/लखीसराय/शेखपुरा/जमुई/बाँका/नवगछिया/अरवल/जहानाबाद/औरंगाबाद/नवादा/कैमूर/बक्सर में एक-एक अनुसूचित जाति/जनजाति थाना की स्थापना तथा उसके संचालन हेतु निम्नांकित पदों के सृजन की स्वीकृति प्रदान की जाती हैः-

क्र0
पदनाम
पे-बैण्ड
ग्रेड पे
पदों की संख्या
1
2
3
4
5
1
अवर निरीक्षक
9300
34800 4200
60
2
सहायक अवर निरीक्षक
5200
20200 2400
90
3
हवलदार
5200
20200 2000
60
4
सिपाही
5200
20200 1900
300
5
 
कुल पद-
510 (पांच सौ दस)

2- इन पदों के सृजन पर कुल वार्षिक व्यय 207735480/-(बीस करोड़ सतहतर लाख पैंतीस हजार चार सौ अस्सी) रूपये अनुमानित है । व्यय विवरणी संलग्न है ।
(परिशिष्ट “क”)
3- उक्त पदों पर होने वाले व्यय की निकासी गैर योजना मद के बजट शीर्ष “2055-पुलिस-109-जिला पुलिस-0001-जिला कार्यकारी दल” एवं विपत्र कोड संख्या NN2055001090001 के अन्तर्गत उपबंधित राशि से विकलनीय होगा ।
4- इन सृजित थानों का क्षेत्रधिकार इसका सम्पूर्ण जिला होगा । नये थाना के गठन के पश्चात पुराने थानों का क्षेत्रधिकार मात्र् संबंधित जिला तक ही समिति होगा।
5- इसमें वित्त विभाग एवं मंत्रिपरिषद की स्वीकृति प्राप्त है ।

विश्वासभाजन
ह0/-
(अमरेश कुमार सिन्हा)
सरकार के अवर सचिव
 
ज्ञापांक-2पी1-1033/85 गृ0आ0 7082/पटना दिनांक 15.9.2011 प्रतिलिपि- पुलिस महानिदेशक बिहार पटना/सभी प्रक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक/सभी क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक/सभी प्रमण्डलीय आयुक्त/सभी जिला पदाधिकारी/सभी पुलिस अधीक्षक/सभी विभाग/सभी विभागाधयक्ष को सूचनार्थ एवं आवश्यक

कार्रवाई हेतु अग्रसारित ।
ह0/-
सरकार के अवर सचिव