श्री नीतीश कुमार

माननीय मुख्यमंत्री, सह अध्यक्ष,

राज्य-स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति

हमारी सरकार, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम एवं नियमावली के सभी प्रावधानों को पूरी तरह से लागू कर चुकी है. बिहार में अत्याचार कांडो के पीडितो को मुआवज़े का भुगतान समय पर किया जा रहा है और साक्षियों को दैनिक भत्ता, यात्रा भत्ता आदि का भुगतान किया जा रहा है। बिहार में सभी ४० पुलिस जिलो में विशेष थानों की स्थापना की जा चुकी है और उनका सुदृढीकरण किया जा रहा है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के आकड़े बताते है कि हत्या और बलात्कार जैसे संगीन अत्याचार के मामले, दूसरे राज्यो की तुलना में, बिहार मे बहुत कम होते है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या की दृष्टि से बिहार का तीसरा स्थान है। हमारी सरकार की सामाजिक समरसता की नीति के कारण बिहार में सभी जातियो में आपसी एकता और भाईचारा बरकरार है।
   बिहार में इस वक्त अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. अत्याचार के मामलों में शिकायतों को दूर करने के लिए सारे उपाय किये जा रहे हैं. पहले की तुलना में अब मामलों के दर्ज करने में किसी दलित को परेशानी नहीं उठानी पड़ती, अगर कहीं ऐसा होता है तो तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उचित कार्रवाई की जाती है। पीड़ितों को क्षतिपूर्ति भी सही समय पर दिए जाने की कार्रवाई की जा रही है।

--श्री नीतीश कुमार
 
 
 
 
Text Box: सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति

नियमावली 1995 की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विशिष्टताओं में एक है राज्य-स्तरीय एवं जिला-स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समितियों की स्थापना का प्रावधान ..अधिनियम एवं नियमावली के प्रावधानों की आवधिक समीक्षा इस प्रकार राज्य के सर्वोच्च स्तर से किये जाने का प्रावधान किसी भी अन्य अधिनियम में नहीं है..

जिला-स्तर पर भी, जिला के प्रभारी अधिकारियों - जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला पुलिस अधीक्षक के साथ सभी जन-प्रतिनिधियों , गैर-सरकारी संगठनो की समीक्षा-गोष्ठी का वैधानिक प्रावधान इतना सशक्त और प्रभावी परिणाम उत्पन्न करने वाला है कि कोई भी उत्तरदायी अधिकारी अपने कर्तव्यों के मूल्यांकन से बच नहीं सकता .. समिति में अनिवार्य-रूप से जन-प्रतिधियों एवं गैर-सरकारी संगठनो के प्रतिनिधियों की उपस्थिति और अपने विचार रखने की स्वतन्त्रता का प्रावधान इस इस अधिनियम और नियमावली को आत्म-सम्पूर्ण बना देता है ..

Text Box: बिहार राज्य सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति

नियमावली 1995 के नियम 16 के प्रावधानान्तर्गत बिहार राज्य में राज्य स्तरीय सतर्कता और अनुश्रवण समिति का पुनर्गठन दिनांक 23 मार्च 2011 को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के एक संकल्प द्वारा किया गया. इस समिति में माननीय अध्यक्ष के अतिरिक्त 25 अन्य सदस्य हैं.

इस समिति में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के 4 संसद-सदस्य, एवं 12 विधान-सभा सदस्य सदस्य हैं तथा :

* मुख्य सचिव

* पुलिस महानिदेशक

* गृह विभाग के सचिव

* निदेशक / उपनिदेशक राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग सदस्य हैं...


अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के सचिव इस समिति के सदस्य-सचिव होते हैं..

बिहार, देश का प्रथम राज्य है जहां नियमानुसार प्रत्येक छः मास पर इस समिति की बैठक आयोजित होती है और इस बैठक में माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा सभी विषयों की गहन समीक्षा की जाती है और अधिकारियों को यथोचित निर्देश दिए जाते हैं.

प्रत्येक छः मास में होने वाली समिति की बैठक का संचालन सदस्य सचिव द्वारा किया जाता है और कार्यावली बिन्दुओं के पाठ के साथ प्रारम्भ होता है और सभी अधिकारी बिंदुवार अपना कृत-कार्रवाई प्रतिवेदन, मौखिक रूप से भी, समिति के माननीय अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत करते हैं.

समिति के अनेक सदस्य अपने क्षेत्र की समस्याओं को अध्यक्ष के समक्ष रखते हैं और सम्बंधित अधिकारियों से पृच्छाओं का उत्तर भी जानना चाहते हैं. समिति की कार्यवाही का सम्पूर्ण वृत्त तैयार किया जाता है और राज्य के सभी जिला-मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक सहित सभी अन्य सम्बद्ध विभागीय अधिकारियों को भेजा जाता है और अगली बैठक के पूर्व सभी अधिकारी, अपना कृत-कार्रवाई प्रतिवेदन अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग को भेजते हैं . समिति की अगली बैठक के पूर्व ही अनुपालन-प्रतिवेदन के रूप में एक पुस्तिका तैयार कर, सदस्य-सचिव द्वारा सभी सदस्यों को दी जाती है जिससे कि वे समिति की बैठक के लिए तैयारी कर सकें..
पुलिस की ओर से कृत-कार्रवाई प्रतिवेदन, अपर पुलिस महानिदेशक , कमजोर वर्ग द्वारा तैयार किया जाता है और विभाग को भेजा जाता है ... समिति के समक्ष पुलिस संबंधी अधिकांश मामलों पर पृच्छाओं का उत्तर, अपर पुलिस महानिदेशक, कमजोर वर्ग द्वारा दिया जाता है.