अत्याचार पीड़ित के लिए देय परिवर्धित मानक क्षतिपूर्ति राशि अविलम्ब प्राप्त करने का अधिकार

पीड़ित या उसके आश्रित परिवार को देय क्षतिपूर्ति के उन महत्वपूर्ण प्रावधानों का विवरण और राहत की अन्य सुविधाओं की

समय-तालिका

जो पीड़ित या उसके आश्रित को प्राथमिकी दर्ज होते ही या अन्त्य-परीक्षण प्रतिवेदन अथवा चिकित्सकीय-जाँच के तुरंत बाद देय होगी


ह्त्या या मृत्यु होने पर : अधिनियम की धारा  3(2)(v)

मृतक का अन्त्य परीक्षण प्रतिवेदन प्राप्त होते ही, देय क्षतिपूर्ति राशि रू 5,00,000=00 की 75% राशि अर्थात 3,75,000=00 (कुल तीन लाख पचहत्तर हज़ार रुपए मात्र ) की राशि पाने का वैधानिक अधिकार है मृतक के आश्रित का . शेष 25% राशि सत्र-न्यायालय द्वारा दोष-सिद्धि होने के तुरंत बाद देय होगी .

इसके अतिरिक्त , पीड़ित के परिवार को तीन महीने के अन्दर : नियमावली के अनुलग्नक -1 की अनुसूची के क्रमांक 21 के प्रावधानान्तर्गत देय पेंशन इत्यादि की राहत भी दी जाएगी .

पुलिस का वैधानिक दायित्व है कि वह मृतक का अन्त्य-परीक्षण प्रतिवेदन अविलम्ब प्राप्त करे और जिला-मजिस्ट्रेट को विहित रीति से तुरंत क्षतिपूर्ति-प्रस्ताव समर्पित करे .


बेगार , बलात् श्रम  या बंधित श्रम का शिकार होने पर : धारा 3(1)(vi)

पीड़ित को, प्राथमिकी दर्ज होते ही देय क्षतिपूर्ति-राशि रु.60,000=00 (कुल साठ हज़ार् मात्र ) का 25%  अर्थात् रु.15,000=00 ( कुल पन्द्रह हज़ार रुपए मात्र ) का भुगतान पाने का अधिकार है . शेष 75% राशि अर्थात् रु.45,000=00 की राशि न्यायालय मे दोष-सिद्धि होने पर प्राप्त होगी.


महिला का लज्जा-भङ्ग या यौन-शोषण : धारा 3(1)(xi)

पीड़ित को , चिकित्सा-जाँच के पश्चात् , देय क्षतिपूर्ति-राशि अर्थात् रु. 1,20,000=00 ( कुल एक लाख बीस हज़ार रूपए मात्र ) का 50% अर्थात् रु.60,000=00 ( कुल साठ हज़ार रुपए मात्र ) का भुगतान तुरंत पाने का अधिकार है . शेष 50% क्षतिपूर्ति-राशि , विचारण-समाप्ति के बाद दी जाएगी.


हमले में निर्योग्यता (Disability ) उत्पन्न हो जाने पर : धारा 3(2)(v)

100% असमर्थता उत्पन्न होने पर –

पीड़ित को , देय क्षतिपूर्ति-राशि 2,50,000=00 (कुल दो लाख पचास हज़ार रुपए मात्र ) का 50% अर्थात् 1,25,000=00 (एक लाख पचीस हज़ार रुपए मात्र ) का भुगतान , प्राथमिकी के तुरंत बाद , चिकित्सक-प्रमाणपत्र मिलते ही, पाने का अधिकार है .शेष 25% राशि आरोप-पात्र तथा अन्य शेष 25% राशि सिद्ध-दोष होने के बाद पाने का अधिकार है.


श्री अरविंद पाण्डेय, पुलिस महानिरीक्षक (कमज़ोर वर्ग) द्वारा दिनांक 08-4-2011 को सम्वाद-कक्ष पटना में आयोजित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवणसमिति की बैठक के लिए तैयार किये गए एवं पत्रांक 1315/शि०नि० को०, दिनांक 14-9-2011 द्वारा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग को प्रेषित कृत-कार्रवाई प्रतिवेदन में नियमावली 1995 के उपबंध – 1 द्वारा विहित और देय क्षतिपूर्ति की राशि में वर्ष 1995 से वर्ष 2011 तक हुई मुद्रास्फीति के समानुपातिक क्षतिपूर्ति राशि में भी वृद्धि किये जाने की अनुशंसा की गयी तथा दिनांक 17 सितम्बर को आयोजित बैठक में प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए मौखिक रूप से भी माननीय मुख्यमंत्री के समक्ष उक्त अनुशंसा की गयी एवं तत्पश्चात, सचिव अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग, विहार, पटना को ज्ञापांक 1421, दिनांक 11.10.2011 द्वारा प्रस्ताव भेजा गया ..

राज्य सरकार द्वारा भारत सरकार को एतत्संबंधी प्रस्ताव भेजा गया और भारत सरकार द्वारा मानक क्षतिपूर्ति राशि में 150% की वृद्धि करते हुए भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के  राजपत्र संख्या 682 दिनांक 23-12-2011 प्रकाशित कर दिया गया है. अतः , सम्प्रति , “परिवर्धित” क्षतिपूर्ति राशि का ही विवरण इस अनुसूची में किया जा रहा है...
नियमावली 1995 का अनुलग्नक-1
अनुसूची
(नियम 12 (4) देखिए)
क्र0सं0
अपराध का नाम
राहत की न्यूनतम राशि       
 
1.
अखाद्य या घृणाजनक पदार्थ पिलाना या खिलाना [धारा 3(1)(i) ] प्रत्येक पीडि़त को अपराध के स्वरूप और गंभीरता को देखते हुए रु०. 60,000/ (रु० साठ हज़ार मात्र) या उससे अधिक और पीडि़त व्यक्ति द्वारा अनादर, अपमान, क्षति तथा मानहानि सहने के अनुपात में भी होगा।
2
क्षति पहुंचाना, अपमानित करना या क्षुब्ध करना [धारा 3(1)(ii)] दिया जाने वाला भुगतान निम्नलिखित होगा-
3
अनादरसूचक कार्य [धारा 3(1)(iii)] 25 प्रतिशत भुगतान जब आरोप पत्र न्यायालय को भेजा जायेगा ।
75 प्रतिशत भुगतान जब निचले न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध ठहराया जाएगा ।
4.
भूमि को सदोष अधिभोग में लेना या उस पर कृषि करना आदि [धारा 3(1)(iv)] अपराध के स्वरूप और गंभीरता को देखते हुए कम से कम रु०. 60,000/ (रु० साठ हज़ार मात्र) या उससे अधिक, भूमि/परिसर/जल की आपूर्ति, जहां आवश्यक हो, सरकारी खर्च पर पुनः वापस की जाएगी । जब आरोप पत्र न्यायालय को भेजा जाए तब पूरा भुगतान किया जायेगा ।  
5.
भूमि परिसर या जल से संबंधित अपराध [धारा 3(1)(v)]
6.
बेगार या बलात्श्रम या बंधुआ मजदूरी कराने का अपराध [धारा 3(1)(vi)] प्रत्येक पीडि़त व्यक्ति को कम से कम 60,000/ (रु० साठ हज़ार मात्र) प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज़ होने पर 25 प्रतिशत और 75 प्रतिशत न्यायालय में दोष सिद्ध होने पर।
7.
मतदान के अधिकार के अतिक्रमण का अपराध [ धारा 3(1)(vii)] प्रत्येक पीडि़त व्यक्ति को रु०.50,000/ (रु० पचास हज़ार मात्र) तक जो अपराध के स्वरूप और गंभीरता पर निर्भर है ।
8.
मिथ्या, द्वेषपूर्ण या तंग करने वाली विधिक कार्यवाही कराने का अपराध [धारा 3(1)(viii)]
रु०. 60,000/ (रु० साठ हज़ार मात्र) या वास्तविक विधिक व्यय और क्षति की प्रतिपूर्ति या अभियुक्त के विचारण की समाप्ति के पश्चात, जो भी कम हो ।
9.
मिथ्या या तुच्छ जानकारी देने का अपराध [धारा 3(1)(ix)]
10.
लोक-दृश्य स्थल में अपमान एवं अभित्रस्त करने का अपराध [धारा 3(1)(ग)] अपराध के स्वरूप पर निर्भर करते हुए, प्रत्येक पीडि़त व्यक्ति को रु०. 60,000/ (रु० साठ हज़ार मात्र) तक 25 प्रतिशत उस समय जब आरोप पत्र न्यायालय को भेजा जाए और शेष दोषसिद्ध होने पर ।
11.
किसी महिला का लज्जा भंग करना [धारा 3(1)(xi)] अपराध के प्रत्येक पीडि़त को रु० 1,20,000/ (रु०.एक लाख बीस हज़ार मात्र)। चिकित्सा जाँच के पश्चात 50 प्रतिशत का भुगतान किया जाए और शेष 50 प्रतिशत का विचारण की समाप्ति पर भुगतान किया जाए ।
12.
महिला का लैंगिक शोषण धारा [3(1)(xii)]
13.
पानी गंदा करने का अपराध [धारा [3(1)(xiii)] रु०. 2,50,000/ (रु०. दो लाख पचास हज़ार मात्र) तक जब पानी को गन्दा कर दिया जाए तो उसे साफ करने सहित या सामान्य सुविधा को पुनः बहाल करने की पूरी लागत । उस स्तर पर जिस पर जिला प्रशासन द्वारा ठीक समझा जाए, भुगतान किया जाए ।
14.
मार्ग के रूढि़जन्य अधिकार से वंचित करने का अपराध [धारा 3(1)(xiv)] 250000/रू0 तक या मार्ग के अधिकार को पुनः बहाल करने की पूरी लागत और जो नुकसान हुआ है, यदि कोई हो, उसका पूरा प्रतिकर। 50 प्रतिशत जब आरोप पत्र न्यायालय को भेजा जाए और 50 प्रतिशत न्यायालय में दोषसिद्ध होने पर।
15.
किसी को निवास स्थान छोड़ने पर मजबूर करने का अपराध [धारा 3(1)(xv)] स्थल बहाल करना । ठहराने का अधिकार और प्रत्येक पीडि़त व्यक्ति को रु०. 60,000/ (रु०. साठ हज़ार मात्र) का प्रतिकर तथा सरकार के खर्च पर मकान का पुनर्निर्माण यदि नष्ट किया गया हो। पूरी लागत का भुगतान जब न्यायालय में आरोप पत्र भेजा जाए ।
16.
मिथ्या साक्ष्य देने का अपराध [धारा 3(2)(i) और (ii)] कम से कम रु०. 2,50,000/ (रु०. दो लाख पचास हज़ार मात्र) या उठाए गए नुकसान या हानि का पूरा प्रतिकर। 50 प्रतिशत का भुगतान जब आरोप पत्र न्यायालय में भेजा जाए और 50 प्रतिशत न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध होने पर ।
17.
भारतीय दण्ड संहिता के अधीन 10 वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध करना [धारा (2)] अपराध के स्वरूप और गंभीरता को देखते हुए प्रत्येक पीडि़त व्यक्ति को या उसके आश्रित को कम से कम रु०. 1,20,000/ (रु०. एक लाख बीस हज़ार मात्र) । यदि अनुसूची में विशिष्ट अन्यथा प्रवाधान किया हुआ हो तो इस राशि में अंतर होगा ।
18.
किसी लोक सेवक के द्वारा उत्पीडित कराने का अपराध [धारा 3(2)(vii)] उठाई गई हानि या नुकसान का पूरा प्रतिकर। 50 प्रतिशत का भुगतान जब आरोप पत्र न्यायालय में भेजा जाए और 50 प्रतिशत का भुगतान जबे न्यायालय में दोषसिद्ध हो जाए, किया जाएगा ।
19.
किसी सदस्य में निर्योग्यता उत्पन्न करने का अपराध।

कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की समय-समय पर यथा संशोधित अधिसूचना सं0 4-2/83-एच. डब्यू-3 तारीख 6.8.1986 में शारीरिक और मानसिक निर्योग्यताओं का उल्लेख किया गया है । अधिसूचना की एक प्रति अनुलग्नक-2 पर है ।
अपराध के प्रत्येक पीडि़त को कम से कम रु०. 2,50,000/ (रु०. दो लाख पचास हज़ार मात्र)। 50 प्रतिशत प्रथम सूचना रिपोर्ट पर और 25 प्रतिशत आरोप पत्र पर और 25 प्रतिशत न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध होने पर ।
100 प्रतिशत असमर्थता

(i) परिवार का न कमाने वाला सदस्य
(ii) परिवार का कमाने वाला सदस्यजहां असमर्थता
अपराध के प्रत्येक पीडि़त को कम से कम रु०. 5,00,000/ (रु०. पांच लाख मात्र) । 50 प्रतिशत प्रथम सूचना रिपोर्ट/चिकित्सा जाँच पर भुगतान किया जायेगा और 25 प्रतिशत जब आरोप पत्र न्यायालय को भेजा जाए और 25 प्रतिशत न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध होने पर ।
100 प्रतिशत से कम असमर्थता उपर्युक्त क (i) और (ii) में निर्धारित दरों को उसी अनुपात में कम किया जाएगा। भुगतान के चरण भी वही रहेंगे। तथापि न कमाने वाले सदस्य को 40000/रू0 से कम नहीं और परिवार के कमाने वाले सदस्य को रु०. 80,000/ (रु०. अस्सी हज़ार मात्र) से कम नहीं होगा ।
20.
हत्या/मृत्यु
(क)परिवार का न कमाने वाला सदस्य

(ख)परिवार का कमाने वाला सदस्य
प्रत्येक मामले में कम से कम रु०. 2,50,000/ (रु०. दो लाख पचास हज़ार मात्र) 75 प्रतिशत पोस्टमार्टम के पश्चात और 25 प्रतिशल न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध होने पर ।

प्रत्येक मामले में कम से कम रु०. 5,00,000/ (रु०. पांच लाख मात्र) 75 प्रतिशत पोस्टमार्टम के पश्चात् और 25 प्रतिशत न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध होने पर ।
 
21.
हत्या, मृत्यु, नरसंहार, बलात्संग, सामूहिक बलात्संग, गिरोह द्वारा किया गया बलात्संग, स्थायी असमर्थता और डकैती । उपर्युक्त मदों के अन्तर्गत भुगतान की गई राहत की रकम के अतिरिक्त राहत की व्यवस्था, अत्याचार की तारीख से तीन माह के भीतर निम्नलिखित रूप से की जाएः-

(i)अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के मृतक की प्रत्येक विधवा और/या अन्य आश्रितों को रु०. 3,000/ (रु०. तीन हज़ार मात्र) प्रतिमास की दर से या मृतक के परिवार के एक सदस्य को रोजगार या कृषि-भूमि, एक मकान, यदि आवश्यकता हो तो तत्काल खरीद द्वारा ।

(ii)पीडि़तों के बच्चों की शिक्षा और उनके भरण-पोषण का पूरा खर्चा । बच्चों को आश्रम विद्यालयों/आवासीय विद्यालयों में दाखिल किया जाए ।

(iii)तीन माह की अवधि तक बर्तनों, चावल, गेहूं, दालों, दलहनों आदि की व्यवस्था ।
22.
पूर्णतया नष्ट/जला हुआ मकान जहां मकान को जला दिया गया हो या नष्ट कर दिया गया हो, वहां सरकारी खर्च पर ईट/पत्थर के मकान का निर्माण किया जाए या उसकी व्यवस्था की जाए ।



अत्याचार-पीड़ित तथा काण्ड के साक्षियों के अन्य अधिकार

1. प्राथमिकी दर्ज करने का अधिकार

2. प्राथमिकी की प्रति तुरंत प्राप्त करने का अधिकार

3. क्षतिपूर्ति प्राप्त करने का अधिकार

4. साक्ष्य देने के क्रम में यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता, भरण-पोषण व्यय और परिवहन सुविधाए तुरंत पाने का अधिकार

5. प्रत्येक महिला साक्षी, अत्याचार से पीडि़त व्यक्ति या उसकी आश्रित महिला या अवयस्क व्यक्ति , 60 वर्ष की आयु से अधिक का व्यक्ति और 40 प्रतिशत या उससे अधिक का निःशक्त व्यक्ति अपने पसंद का परिचर अपने साथ लाने का और उस परिचर को भी अपने सामान सुविधा दिलाने का अधिकार

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रत्येक नागरिक का यह अधिकार है कि यदि उसके साथ किसी गैर- अनुसूचित जाति एवं गैर-अनुसूचित जनजाति के किसी व्यक्ति द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण ) अधिनियम 1989 की धारा 3 में परिगणित प्रकार के अपराध किए जाते हैं तो वह बिहार-राज्य के किसी भी थाना अथवा प्रत्येक जिला में संस्थापित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विशेष थाना में जाकर, अपने साथ किये गए अपराध की प्राथमिकी दर्ज करने के लिए थानाध्यक्ष को मौखिक या लिखित रूप से सूचित करे जिसके आधार पर थानाध्यक्ष द्वारा तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जाएगी तथा प्राथमिकी की एक प्रति परिवादी को वहीँ प्राप्त करा दी जाएगी

यदि ऐसा पीड़ित व्यक्ति थाना नहीं जा सकता है तब वह फोन, पत्र या ईमेल द्वारा भी उस अपराध की सूचना थानाध्यक्ष या उस जिले के पुलिस अधीक्षक को दे सकता है और तब उस सूचना के आधार पर भी प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस द्वारा अन्वेषण प्रारम्भ किया जाएगा।

उपर्युक्त अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण ) अधिनियम 1989 की धारा 3 को निम्नवत उद्धृत किया जाता है :

अत्याचार के अपराध
धारा-3
अत्याचार के अपराधों के लिए दंड
 

कोई भी व्यक्ति जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है:


3(1)(i) अनुसूचित-जाति या अनुसूचित-जनजाति के सदस्य को अखाद्य या घृणा- जनक पदार्थ पीने या खाने के लिए मजबूर करेगा

3(1)(ii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के परिसर या पड़ोस में मलमूत्र, कूड़ा, पशु-शव या कोई अन्य घृणाजनक पदार्थ इकट्ठा करके, उसे क्षति पहुँचाने, अपमानित करने या क्षुब्ध करने के आशय से कार्य करेगा

3(1)(iii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य के शरीर से बलपूर्वक कपड़े उतारेगा या उसे नंगा या उसके चेहरे या शरीर को पोतकर घुमाएगा या इसी प्रकार का कोई अन्य ऐसा कार्य करेगा जो मानव के सम्मान के विरुद्ध है

3(1)(iv) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के स्वामित्वाधीन या उसे आवंटित या किसी सक्षम-प्राधिकारी द्वारा उसे आवंटित किए जाने के लिए अधिसूचित किसी भूमि को सदोष अधिभोग में लेगा या उस पर खेती करेगा या उस आवंटित भूमि को अंतरित करा लेगा

3(1)(v) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को उसकी भूमि या परिसर से सदोष बेकब्जा करेगा या किसी भूमि परिसर या जल पर उसके अधिकारों के उपभोग में हस्तक्षेप करेगा

3(1)(vi) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को बेगार करने के लिए या सरकार द्वारा लोक-प्रयोजनों के लिए अधिरोपित किसी अनिवार्य सेवा से भिन्न अन्य समरुप प्रकार से बलात्श्रम या बंधुआ मजदूरी के लिए विवश करेगा या फुसलाएगा

3(1)(vii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को मतदान न करने के लिए या किसी विशिष्ट अभ्यर्थी के लिए मतदान करने के लिए या विधि द्वारा उपबन्धित रीति से भिन्न रीति से मतदान करने के लिए मजबूर या अभित्रस्त करेगा

3(1)(viii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के विरुद्ध मिथ्या, द्वेषपूर्ण या तंग करने वाला वाद या दाण्डिक या अन्य विधिक कार्यवाही संस्थित करेगा

3(1)(ix) किसी लोक सेवक को कोई मिथ्या या तुच्छ जानकारी देगा और उसके द्वारा अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को क्षति पहुंचाने या क्षुब्ध करने के लिए ऐसे लोक सेवक से उसकी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग कराएगा

3(1)(x) जनता को दृष्टिगोचर किसी स्थान में, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य का अपमान करने के आशय से साशय उसको अपमानित या अभित्रस्त करेगा

3(1)(xi) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की किसी महिला का अनादर करने या उसकी लज्जा भंग करने के आशय से हमला या बल प्रयोग करेगा

3(1)(xii) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की किसी महिला की इच्छा को अधिशासित करने की स्थिति में होने पर, उस स्थिति का प्रयोग, उसका लैंगिक शोषण करने के लिए करेगा जिसके लिये वह अन्यथा सहमत नहीं होती

3(1)(xiii) किसी स्रोत, जलाशय या किसी अन्य उद्गम के जल को, जो आम-तौर पर अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों द्वारा उपयोग में लाया जाता है, दूषित या गंदा करेगा जिससे कि वह उस प्रयोजन के लिए कम उपयुक्त हो जाए जिसके लिये उसका आमतौर पर प्रयोग किया जाता है

3(1)(xiv) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को सार्वजनिक अभिगम के स्थान के मार्ग के किसी रुढि़जन्य अधिकार से वंचित करेगा या किसी सदस्य को बाधा पहुंचाएगा जिससे कि वह ऐसे सार्वजनिक अभिगम के स्थान का उपयोग करने या वहां पहुंचने से निवारित हो जाए जहां जनता के अन्य सदस्यों या उसके किसी भाग को उपयोग करने का या पहुंचने का अधिकार है

3(1)(xv) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को अपना मकान, गांव या अन्य निवास-स्थान छोड़ने के लिए मजबूर करेगा या कराएगा वह कारावास से जिसकी अवधि छह माह से कम की नहीं होगी किन्तु जो पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से दण्डनीय होगा।

3(2)(i) कोई भी व्यक्ति जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है:

3(2)(ii) मिथ्या साक्ष्य देगा या गढ़ेगा जिससे उसका आशय अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को किसी ऐसे अपराध के लिए, जो तत्समय प्रवृत्त-विधि द्वारा मृत्युदंड से दंडनीय है, दोषसिद्ध कराना है या वह यह जानता है कि इससे उसकी दोषसिद्धि होनी संभाव्य है, वह आजीवन कारावास से और जुर्माने से दंडनीय होगा और यदि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जाति के किसी निर्दोष सदस्य को ऐसे मिथ्या या गढ़े हुए साक्ष्य के फलस्वरुप दोषसिद्ध किया जाता है और फांसी दी जाती है तो वह व्यक्ति जो ऐसा मिथ्या साक्ष्य देता है या गढ़ता है, मृत्यु दंड से दंडनीय होगा ।

3(2)(iii) मिथ्या साक्ष्य देगा या गढ़ेगा जिससे उसका आशय अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध कराना है , जो मृत्यु दंड से दंडनीय नहीं है किन्तु सात वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दण्डनीय है , या वह यह जानता है कि उससे उसकी दोषसिद्धि होनी संभाव्य है , वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो सात वर्ष या उससे अधिक की हो सकेगी और जुर्माने से दण्डनीय होगा ।

3(2)(iv) अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि करेगा जिससे उसका आशय अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य की किसी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाना है या वह यह जानता है कि उससे ऐसा होना संभाव्य है, वह कारावास से जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से दण्डनीय होगा ।

3(2)(v) अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि करेगा जिससे उसका आशय किसी ऐसे भवन को जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य द्वारा साधारणतः पूजा के स्थान के रुप में या मानव-आवास के स्थान के रुप में या सम्पत्ति की अभिरक्षा के लिए किसी स्थान के रुप में उपयोग किया जाता है, नष्ट करता है या वह यह जानता है कि उससे ऐसा होना संभाव्य है, वह आजीवन कारावास से और जुर्माने से दण्डनीय होगा ।

3(2)(vii) भारतीय दंड संहिता 1960 के अधीन दस वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दण्डनीय कोई अपराध किसी व्यक्ति या सम्पत्ति के विरुद्ध इस आधार पर करेगा कि ऐसा व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य है या ऐसी संपत्ति ऐसे सदस्य की है, वह आजीवन कारावास से और जुर्माने से दण्डनीय होगा ।

3(2)(viii) यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि इस अध्याय के अधीन कोई अपराध किया गया है वह अपराध किये जाने के किसी साक्ष्य को अपराधी को विधिक दंड से बचाने के आशय से गायब करेगा या उस आशय के बारे में कोई ऐसी जानकारी देगा जो वह जानता है या विश्वास करता है कि वह मिथ्या है, वह उस अपराध के लिए उपबन्धित दण्ड से दण्डनीय होगा ।

3(2)(ix) लोक सेवक होते हुए इस धारा के अधीन कोई अपराध करेगा वह कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु जो उस अपराध के लिए उपबन्धित दण्ड तक हो सकेगी, दण्डनीय होगा ।

अत्याचार-पीड़ित को क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार :

उक्त अधिनियम के अधीन अपराध से पीड़ित व्यक्ति को अधिनियम की धारा 12(4) के प्रावधानान्तार्गत अनुसूची 1 के अनुसार क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार है . काण्ड का अन्वेषक, विहित समयावधि में , विहित रीति से, ऐसा क्षतिपूर्ति-प्रस्ताव,जिला-मजिस्ट्रेट को देने के लिए विधि द्वारा आबद्ध होता है ।

महत्वपूर्ण :

ह्त्या-काण्ड में मृत-व्यक्ति के आश्रित को तथा क्षति-कारक हमला एवं बलात्संग के अपराध-पीड़ित व्यक्ति को अधिकार है कि वह नियमावली की अनुसूची में वर्णित मानक के आलोक में अन्त्य-परीक्षण प्रतिवेदन एवं क्षति-प्रतिवेदन निर्गत होते ही देय-क्षतिपूर्ति राशि का 75% अविलम्ब प्राप्त करे ।

उक्त धारा को निम्नवत उद्धृत किया जाता है :

धारा 12(4) जिला मजिस्ट्रेट या उपखंड अथवा कोई अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट, इन नियमों से उपाबद्ध अनुसूची में दिए गए मान के अनुसार, अत्याचार से पीडि़त व्यक्तियों, उनके कुटुम्ब के सदस्यों और आश्रितों को नकद या वस्तु अथवा दोनों रुप में तत्काल राहत देने की व्यवस्था करेगा । ऐसी राहत में भोजन जल कपड़े आश्रय चिकित्सा सुविधा परिवहन सुविधा और अन्य आवश्यक मदें भी सम्मिलित होगी जो मानव के लिए आवश्यक हैं ।

धारा 12 (5) उप-नियम (4) के अधीन अत्याचार पीडि़त व्यक्ति को उसके/उसकी आश्रित को, मृत्यु या क्षति अथवा सम्पत्ति का हुए नुकसान के लिए राहत, तत्काल प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन प्रतिकर का दावा करने वाले किसी अन्य अधिकार के अतिरिक्त होगा ।

धारा 12(6) उप-नियम (4) में उल्लिखित राहत और पुनर्वास सुविधाए,जिला मजिस्ट्रेट अथवा किसी अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा, इन नियमों की उपाबद्ध अनुसूची में दिए गए मान के अनुसार प्रदान की जाएगी ।

धारा 12 (7) जिला मजिस्ट्रेट या उप खंड मजिस्ट्रेट अथवा पुलिस अधीक्षक द्वारा पीडि़त व्यक्तियों को राहत और पुनर्वास सुविधाओं की एक रिपोर्ट विशेष न्यायालय को अग्रेषित की जाएगी । यदि विशेष न्यायालय का समाधान हो जाता है कि राहत का संदाय, पीडि़त व्यक्ति अथवा उसके/उसकी आश्रित को समय पर नहीं किया गया अथवा राहत या प्रतिकर पर्याप्त नहीं था अथवा राहत और प्रतिकर के केवल एक भाग का संदाय किया गया तो यह राहत अथवा कोई अन्य प्रकार की सहायता का पूर्ण अथवा आंशिक संदाय करने का आदेश दे सकेगा ।


नियम-11
अत्याचार-काण्ड के साक्षियों को पुलिस या न्यायालय के समक्ष साक्ष्य हेतु जाने पर यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता भरण-पोषण व्यय और परिवहन सुविधाए तुरंत पाने का अधिकार है ।

अत्याचार से पीडि़त व्यक्ति उसके आश्रितों तथा साक्षियों को यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता भरण-पोषण व्यय और परिवहन सुविधाए:

(1) अत्याचार पीडि़त प्रत्येक व्यक्ति उसके आश्रित और साक्षियों को उसके आवास अथवा ठहरने के स्थान से अधिनियम के अधीन अपराध के अन्वेषण या सुनवाई या विचारण के स्थान तक का एक्सप्रेस/मेल/यात्री ट्रेन में द्वितीय श्रेणी का आने-जाने का रेल भाड़ा अथवा वास्तविक बस या टैक्सी भाड़े का संदाय किया जाएगा ।

(2) जिला मजिस्ट्रेट या उपखंड मजिस्ट्रेट अथवा कोई अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट अत्याचार से पीडि़त व्यक्तियों और साक्षियों को अन्वेषण अधिकारी पुलिस अधीक्षक/पुलिस उप अधीक्षक जिला मजिस्ट्रेट या किसी अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास जाने के लिए परिवहन सुविधाए देने अथवा उसके पूरे संदाय की प्रतिपूर्ति की आवश्यक व्यवस्था करेंगे ।

(3) प्रत्येक महिला साक्षी, अत्याचार से पीडि़त व्यक्ति या उसकी आश्रित महिला या अवयस्क व्यक्ति , 60 वर्ष की आयु से अधिक का व्यक्ति और 40 प्रतिशत या उससे अधिक का निःशक्त व्यक्ति अपने पसंद का परिचर अपने साथ लाने का हकदार होगा । परिचर को भी इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध की सुनवाई अन्वेषण और विचारण के दौरान बुलाए जाने पर साक्षी अथवा अत्याचार से पीडि़त व्यक्ति को देय यात्रा और भरणपोषण व्यय का संदाय किया जाएगा ।

(4) साक्षी, अत्याचार से पीडि़त व्यक्ति या उसका/उसकी आश्रित तथा परिचर को अपराध के अन्वेषण सुनवाई और विचारण के दौरान उसके आवास अथवा ठहरने के स्थान से दूर रहने के दिनों के लिए ऐसी दरों पर दैनिक भरण-पोषण व्यय का संदाय किया जाएगा जो राज्य सरकार द्वारा कृषि श्रमिकों के लिए नियत की गयी न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं होगा ।

(5) साक्षी, अत्याचार से पीडि़त व्यक्ति अथवा उसका/उसकी आश्रित और परिवार को दैनिक भरण-पोषण व्यय के अतिरिक्त आहार व्यय का भी ऐसी दरों पर संदाय किया जाएगा जैसा कि राज्य सरकार समय-समय पर नियत करे ।

(6) पीडि़त व्यक्तियों उनके आश्रितों/परिचर तथा साक्षियों को अन्वेषण अधिकारी या पुलिस थाना के भारसाधक अथवा अस्पताल प्राधिकारियों या पुलिस अधीक्षक/उप पुलिस अधीक्षक अथवा जिला मजिस्ट्रेट या किसी अन्य संबंधित अधिकारी के पास अथवा विशेष न्यायालय जाने के दिनों के लिए यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता, भरणपोषण व्यय तथा परिवहन सुविधाओं की प्रतिपूर्ति जिला मजिस्ट्रेट अथवा उप खंड मजिस्ट्रेट अथवा किसी अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा तुरंत अथवा अधिक से अधिक तीन दिनों में किया जाएगा

(7) जब अधिनियम की धारा 3 के अधीन कोई अपराध किया गया है तो जिला मजिस्ट्रेट या उप-खंड मजिस्ट्रेट अथवा कोई अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट, अत्याचार से पीडि़त व्यक्तियों के लिए औषधियों, विशेष परामर्श रक्ताधान बदलने के लिए आवश्यक वस्त्र; भोजन और फलों के लिए संदाय की प्रतिपूर्ति करेंगे ।