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जिला मजिस्ट्रेट एवं अन्य अधिकारियों के कर्तव्य
अधिनियम एवं नियमावली में जिला मजिस्ट्रेट एवं अन्य अधिकारियों के विशिष्ट कर्तव्य विनिर्धारित हैं जिन्हें क्रमशः निम्नवत प्रस्तुत किया जाता है :
 
जिला मजिस्ट्रेट के कर्तव्य

नियम-6.
स्थल - निरीक्षण का कर्तव्य
:

(1) जब कभी जिला मजिस्ट्रेट या उपखण्ड मजिस्ट्रेट या अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट पुलिस अधिकारी जो पुलिस उप-अधीक्षक से कम की पंक्ति का न हो किसी व्यक्ति से अथवा अपनी ही जानकारी से सूचना प्राप्त करता है कि उसकी अधिकारिता के भीतर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों पर अत्याचार किया गया है तो तुरन्त वह अत्याचार से हुई जीवन हानि, सम्पत्ति हानि और नुकसान की सीमा को निर्धारण करने के लिए स्वयं घटना स्थल पर जाएगा और राज्य सरकार को तत्काल एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा ।

(2) जिला मजिस्ट्रेट या उपखण्ड मजिस्ट्रेट अथवा कोई अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक/पुलिस उप अधीक्षक उस स्थान या क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद उस स्थल पर-
(क) राहत के हकदार पीडि़तों उनके कुटुम्ब के सदस्यों और आश्रितों की एक सूची बनाएगा;
(ख) अत्याचार पीडि़तों की सम्पत्ति की हानि और नुकसान की सीमा की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा;
(ग) क्षेत्र में पुलिस की गहन गश्त के आदेश देगा;
(घ) साक्षियों और पीडि़तों से सहानुभूति रखने वाले को सुरक्षा प्रदान करने के प्रभावी और आवश्यक उपाय करेगा पीडि़तों को तत्काल राहत प्रदान करेगा ।

नियम-11

अत्याचार से पीडि़त व्यक्ति, उसके आश्रितों तथा साक्षियों को यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता, भरण-पोषण व्यय और परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने संबंधी जिला-मजिस्ट्रेट के कर्तव्य


(1) अत्याचार पीडि़त प्रत्येक व्यक्ति, उसके आश्रित और साक्षियों को उसके आवास अथवा ठहरने के स्थान से अधिनियम के अधीन अपराध के अन्वेषण या सुनवाई या विचारण के स्थान तक का एक्सप्रेस/मेल/यात्री ट्रेन में द्वितीय-श्रेणी का आने-जाने का रेल भाड़ा अथवा वास्तविक बस या टैक्सी भाड़े का संदाय किया जाएगा ।

(2) जिला मजिस्ट्रेट या उपखंड मजिस्ट्रेट अथवा कोई अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट, अत्याचार से पीडि़त व्यक्तियों और साक्षियों को अन्वेषण अधिकारी पुलिस अधीक्षक/पुलिस उप अधीक्षक जिला मजिस्ट्रेट या किसी अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास जाने के लिए परिवहन सुविधाए देने अथवा उसके पूरे संदाय की प्रतिपूर्त्ति की आवश्यक व्यवस्था करेंगे ।

(3) प्रत्येक महिला साक्षी, अत्याचार से पीडि़त व्यक्ति या उसकी आश्रित महिला या अवयस्क व्यक्ति वर्ष की आयु से अधिक का व्यक्ति और 40 प्रतिशत या उससे अधिक का निःशक्त व्यक्ति, अपने पसंद का परिचर अपने साथ लाने का हव़दार होगा । परिचर को भी इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध की सुनवाई, अन्वेषण और विचारण के दौरान बुलाए जाने पर, साक्षी अथवा अत्याचार से पीडि़त व्यक्ति को देय यात्रा और भरणपोषण व्यय का संदाय किया जाएगा ।

(4) साक्षी, अत्याचार से पीडि़त व्यक्ति या उसका/उसकी अश्रित तथा परिचर को अपराध के अन्वेषण, सुनवाई और विचारण के दौरान उसके आवास अथवा ठहरने के स्थान से दूर रहने के दिनों के लिए ऐसी दरों पर दैनिक भरण-पोषण व्यय का संदाय किया जाएगा जो उस न्यूनतम मजदूरी से, जैसा कि राज्य सरकार ने कृषि श्रमिकों के लिए नियत की हो, कम नहीं होगा ।

(5) साक्षी, अत्याचार से पीडि़त व्यक्ति (अथवा उसका/उसकी आश्रित) और परिवार को दैनिक भरण-पोषण व्यय के अतिरिक्त आहार व्यय का भी ऐसी दरों पर संदाय किया जाएगा जैसा कि राज्य सरकार समय-समय पर नियत करे ।

(6) पीडि़त व्यक्तियों, उनके आश्रितों/परिचर तथा साक्षियों को अन्वेषण अधिकारी या पुलिस थाना के भारसाधक अथवा अस्पताल प्राधिकारियों या पुलिस अधीक्षक/उप पुलिस अधीक्षक अथवा जिला मजिस्ट्रेट या किसी अन्य संबंधित अधिकारी के पास अथवा विशेष न्यायालय जाने के दिनों के लिए यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता, भरणपोषण व्यय तथा परिवहन सुविधाओं की प्रतिपूर्ति जिला मजिस्ट्रेट अथवा उप खंड मजिस्ट्रेट अथवा किसी अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा तुरंत अथवा अधिक से अधिक तीन दिनों में किया जाएगा

(7) जब अधिनियम की धारा 3 के अधीन कोई अपराध किया गया है तो जिला मजिस्ट्रेट या उप-खंड मजिस्ट्रेट अथवा कोई अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट अत्याचार से पीडि़त व्यक्तियों के लिए औषधियों, विशेष परामर्श, रक्ताधान बदलने के लिए आवश्यक वस्त्र भोजन और फलों के लिए संदाय की प्रतिपूर्ति करेंगे ।
जिला स्तरीय सतर्कता और अनुश्रवण समिति की प्रत्येक तीन माह पर बैठक करना और समीक्षा का कर्तव्य पूर्ण करना

नियम-12

विहित समयावधि में अत्याचार पीडितो को क्षतिपूर्ति एवं पुनर्वास सुविधा देने का कर्तव्य

(1) जीवन हानि और सम्पत्ति के हुए नुकसान का निर्धारण करने और राहत के लिए पीडि़त व्यक्तियों उनके कुटुम्ब के सदस्यों और आश्रितों की एक सूची तैयार करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट तथा पुलिस अधीक्षक उस स्थान या क्षेत्र में जाएगें जहां अत्याचार किया गया है ।

(4) जिला मजिस्ट्रेट, या उपखंड अथवा कोई अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट इन नियमों (उपाबंध 2 के साथ गठित उपाबंध) से उपाबद्ध अनुसूची में दिए गए मान के अनुसार अत्याचार से पीडि़त व्यक्तियों, उनके कुटुम्ब के सदस्यों और आश्रितों को नकद या वस्तु अथवा दोनों रुप में तत्काल राहत देने की व्यवस्था करेगा । ऐसी राहत में भोजन, जल, कपड़े, आश्रय, चिकित्सा सुविधा, परिवहन सुविधा और अन्य आवश्यक मदें भी सम्मिलित होगी जो मानव के लिए आवश्यक हैं ।

(5) उप-नियम (4) के अधीन अत्याचार पीडि़त व्यक्ति को उसके/उसकी आश्रित को मृत्यु या क्षति अथवा सम्पत्ति का हुए नुकसान के लिए राहत तत्काल प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन प्रतिकर का दावा करने वाले किसी अन्य अधिकार के अतिरिक्त होगा ।

(6) उप-नियम (4) में उल्लिखित राहत और पुनर्वास सुविधाए जिला मजिस्ट्रेट अथवा किसी अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा इन नियमों की उपाबद्ध अनुसूची में दिए गए मान के अनुसार प्रदान की जाएगी ।

(7) जिला मजिस्ट्रेट या उप खंड मजिस्ट्रेट अथवा पुलिस अधीक्षक द्वारा पीडि़त व्यक्तियों को राहत और पुनर्वास सुविधाओं की एक रिपोर्ट विशेष न्यायालय को अग्रेषित की जाएगी । यदि विशेष न्यायालय का समाधान हो जाता है कि राहत का संदाय पीडि़त व्यक्ति अथवा उसके/उसकी आश्रित को समय पर नहीं किया गया अथवा राहत या प्रतिकर पर्याप्त नहीं था अथवा राहत और प्रतिकर के केवल एक भाग का संदाय किया गया तो यह राहत अथवा कोई अन्य प्रकार की सहायता का पूर्ण अथवा आंशिक संदाय करने का आदेश दे सकेगा ।

नियम-17.
जिले में सतर्कता और अनुश्रवण समिति की स्थापना करने का कर्तव्य

(1) राज्य के अन्तर्गत प्रत्येक जिले में जिला मजिस्ट्रेट, अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के कार्यान्वयन, पीडि़त व्यक्तियों को दी गई राहत और पुनर्वास सुविधाएं तथा उससे सम्बद्ध अन्य मामलों, अधिनियम के अधीन मामलों का अभियोजन, अधिनियम के उपबंधों के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार विभिन्न अधिकारियों/अभिकरणों की भूमिका तथा जिला प्रशासन द्वारा प्राप्त विभिन्न रिपोर्टों के पुनर्विलोकन के लिए अपने जिले में सतर्कता और अनुश्रवण समिति की स्थापना करेगा

(2) जिला स्तरीय सतर्कता और अनुश्रवण समिति में संसद, राज्य विधान सभा तथा विधान परिषद् के चुने गए सदस्य, पुलिस अधीक्षक, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित राज्य सरकार के तीन समूह ''क'' के अधिकारी/राजपत्रित अधिकारी तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित अधिक से अधिक 5 गैर-सरकारी सदस्य तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के भिन्न प्रवर्ग के ऐसे अधिक से अधिक 3 सदस्य होंगे जो गैर-सरकारी संगठनों से सहबद्ध हैं । जिला मजिस्ट्रेट तथा जिला कल्याण अधिकारी क्रमशः अध्यक्ष और सदस्य सचिव होंगे ।

(3) जिला स्तरीय समिति की तीन मास में कम से कम एक बार बैठक होगी ।

विशेष अधिकारी के कर्तव्य


नियम-9 : विशेष अधिकारी की नियुक्ति
परिलक्षित क्षेत्र में अपर जिला मजिस्ट्रेट के रैंक से अन्यून एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति जिला मजिस्ट्रेट पुलिस अधीक्षक या अधिनियम के उपबंधों के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार अन्य अधिकारियों, विभिन्न समितियों और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति संरक्षण कक्ष के साथ समन्वय करने के लिए, की जाएगी ।

विशेष अधिकारी निम्नलिखित के लिए उत्तरदायी होगा :

(क) अत्याचार से पीडि़त व्यक्तियों को तत्काल राहत और अन्य सुविधाए प्रदान करना और अत्याचार के पुनः होने को निवारित करने या उससे बचने के आवश्यक उपाय करना.

(ख) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित व्यक्तियों को उनके अधिकारों और विभिन्न केन्द्रीय और राज्य सरकारों की अधिनियमितियों या नियमों और तदधीन तैयार की गई योजनाओं के उपबंधों के अधीन उन्हें प्राप्त संरक्षण के बारे में शिक्षित करने के लिए परिलक्षित क्षेत्र में चेतना-केन्द्र की स्थापना तथा कार्यशालाओं का आयोजन करना.

(ग) गैर-सरकारी संगठनों के साथ समन्वयन करना और केन्द्रों के रख-रखाव या कार्यशालाओं का आयोजन करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों को आवश्यक सुविधाओं वित्तीय तथा अन्य प्रकार की सहायता प्रदान करना.
नोडल अधिकारी के कर्तव्य
नियम 9.
राज्य सरकार, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक या उनके द्वारा प्राधिकृत अन्य अधिकारियों के, अधिनियम के उपबंधों के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार अन्वेषण अधिकारियों और अन्य अधिकारियों के कार्यकरण का समन्वय करने के लिए सरकार के सचिव के स्तर के अधिकारी को, जो अधिमानतः अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित हो, नोडल अधिकारी नामनिर्देशित करेगी । प्रत्येक तिमाही के अन्त में नोडल अधिकारी निम्नलिखित का पुनर्विलोकन करेगा

(1) नियम 4 के उपनियम (2) और उप-नियम (4) नियम 6 नियम 8 के खण्ड (गप) के अधीन राज्य सरकार द्वारा प्राप्त रिपोर्ट ।

(2) अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत मामलों की स्थिति ।

(3) परिलक्षित क्षेत्र में विधि व्यवस्था की स्थिति ।

(4) अत्याचार से पीडि़त व्यक्तियों या उसके आश्रित को नकद या वस्तु रुप में अथवा दोनों में तत्काल राहत उपलब्ध कराने के लिए अपनाए गए विभिन्न उपाय ।

(5) अत्याचार से पीडि़त व्यक्तियों या उसके आश्रितों को राशन वस्त्र आश्रय विधिक सहायता यात्रा भत्ता दैनिक भत्ता तथा परिवहन सुविधाओं जैसी तत्काल दी जाने वाली सुविधाओं की पर्याप्तता ।

(6) अधिनियम के उपबंधों के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार गैसरकारी संगठनों अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति संरक्षण कक्ष विभिन्न समितियों और लोक सेवकों का कर्त्तव्यपालन ।

अभियोजन निदेशक के कर्तव्य
नियम - 4 : अभियोजन का पर्यवेक्षण और उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का कर्तव्यः
(1) राज्य सरकार, जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिश पर, विशेष न्यायलयों में मामलों का संचालन करने हेतु प्रत्येक जिले के लिए ऐसे विशिष्ट ज्येष्ठ अधिवक्ताओं की संख्या का एक पैनल तैयार करेगी जैसा वह उचित समझे, जो कम से कम सात वर्षों से विधि व्यवसाय में हो । इसी प्रकार, अभियोजन निदेशक/ अभियोजन के भारसाधकों के परामर्श से विशेष न्यायालयों में मामलों का संचालन करने के लिए लोक अभियोजकों का ऐसी संख्या में एक पैनल भी तैयार किया जाएगा जैसा वह उचित समझे । ये दोनों पैनल राज्य के राजपत्र में भी अधिसूचित किए जाए और तीन वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहेंगे ।

(2) जिला मजिस्ट्रेट और अभियोजन निदेशक/अभियोजन का भारसाधक, एक कलेंडर वर्ष में दो बार जनवरी तथा जुलाई के मास में इस प्रकार विनिर्दिष्ट या नियुक्त विशेष लोक अभियोजकों के कर्तव्यों का पुनर्विलोकन करेंगे और राज्य सरकार को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगे

(3) यदि राज्य सरकार का यह समाधान हो गया है या यह विश्वास करने का कारण है कि इस प्रकार नियुक्त या विनिर्दिष्ट किसी विशेष लोक अभियोजक ने अपनी सर्वोत्तम योग्यता से तथा सम्यक् सावधानी और सतर्कता से मामले का संचालन नहीं किया है तो उसका नाम, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, अधिसूचना से निकाल दिया जाएगा ।

(4) जिला मजिस्ट्रेट और जिला स्तर पर अभियोजन का भारसाधक, अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत मामलों की स्थिति का पुनर्विलोकन करेंगे तथा प्रत्येक पश्चाद्वर्ती मास की 20वीं तारीख को या उससे पहले अभियोजन निदेशक और राज्य सरकार को एक मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे । इस रिपोर्ट में प्रत्येक मामले के अन्वेषण और अभियोजन के संबंध में की गई प्रस्तावित कार्रवाइयां विनिर्दिष्ट होंगी

उपर्युक्त कर्तव्यों की उपेक्षा के लिए अधिनियम की धारा 4 में दंडात्मक प्रावधान किये गए हैं
अधिनियम की धारा 4
कर्तव्यों की उपेक्षा के लिए दंड

कोई भी लोक सेवक , जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है, इस अधिनियम में उसके द्वारा पालन किए जाने के लिए अपेक्षित अपने कर्त्तव्यों की जानबूझकर उपेक्षा करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी. दण्डनीय होगा ।